वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और पूजा विधि

Vaibhav Lakshmi Vrat Katha aur Pujan Vidhi

वैभव लक्ष्मी की पूजा – हिन्दू धर्म मान्यताओं में देवी लक्ष्मी अभावों का अंत करती हैं। जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार भाव भाव प्रधान होते हैं। जहां बुरी सोच नारकीय जीवन की ओर ले जाती है, तो सद्भाव अभावों का नाश कर वैभवशाली बनाते हैं।
भाव और वैभव के जरिए जीवन में अभावों की खाई भरने के लिए ही देवी लक्ष्मी का ही स्वरूप वैभव लक्ष्मी का स्मरण शुभ माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक देवी उपासना के किसी भी विशेष दिन जैसे- शुक्रवार, नवमी, नवरात्रि या अमावस्या की शाम या रात को विशेष मंत्र से लक्ष्मी का ध्यान मनचाहे आनंद व समृद्धि देता है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार देवी भक्ति के विशेष दिन शुक्रवार को वैभव लक्ष्मी मंत्र से महालक्ष्मी का स्मरण दरिद्रता व बुरे दौर से भी छुटकारा देने वाला माना गया है। जानिए वैभव लक्ष्मी की उपासना का विशेष मंत्र उपाय-

शुक्रवार को पूरे दिन यथासंभव व्रत रख शाम को माता लक्ष्मी की पूजा करें।

– वैभव लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र की पूजा में खासतौर पर लाल चंदन, गंध, लाल वस्त्र, लाल फूल अर्पित करें। दूध के पकवानों या खीर का भोग लगाएं।

– पूजा के बाद समृद्धि व शांति की इच्छा से इस वैभव लक्ष्मी मंत्र का यथाशक्ति जप करें-

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती॥

– इस मंत्र जप के बाद वैभव लक्ष्मी व्रत कथा पढ़े या सुने। गोघृत (गाय के घी) दीप से आरती करें।

– माता लक्ष्मी से क्षमा प्रार्थना व हर अभाव दूर करने की कामना करें। प्रसाद ग्रहण कर घर के द्वार पर देवी लक्ष्मी से घर में आकर बसने की कामना करते हुए एक दीप लगाएं।

– और अंत में देवी लक्ष्मी की आरती और लक्ष्मी चालीसा का जप करे ।

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