पुराना भजन लिरिक्स | कान्हा जी के भजन लिखित में | हरी भजन लिरिक्स

ढोलक पर गाने वाले भजन लिरिक्स कृष्णा | ढोलक पर कृष्ण जी के भजन लिरिक्स इन  हिंदी | कृष्ण जी के भजन लिखे हुए हिंदी में

पुराना भजन लिरिक्स | कान्हा जी के भजन लिखित में | हरी भजन लिरिक्स

अगर आप भगवान श्री कृष्ण के पुराने भजन को ढूंड रहे हैं तो आप सही जगह पर आये हैं यहाँ पर हम आपके लिए भगवान हरि के भजन लिरिक्स और कान्हा जी के भजन लिरिक्स हिंदी में लेकर आये हैं ये पुराने भजन बहुत ही सुंदर और कृष्ण जी की लीला से जुड़े हुए हैं आओ देखें  कान्हा जी के भजन लिखित में;

भजन (1)

तेरी शरण पडा मैं आय नाथ मोहे दे दर्शन प्यारा ।। टेक ।। 

गोकुल ढूंडी मथुरा ढूंडी बिंदरावन सारा,

काशीपुरी सकल फिर ढूंडी ढूंडा हरिद्वारा ।। १ ।।

कोई वैकुंठ कैलास बतावे कोई सागर पारा,

कोई कहे सब जगके भीतर व्यापक कर्तारा ।। २ ।।

संत बतावें घटके मांही परगट उजियारा,

कोई कहे वो अलख निरंजन सचसे है न्यारा ।। ३ ।। 

चतुर्भुजा पीतांबर सोहे शीश मुकुट धारा,

ब्रह्मानंद मैं दर्शन पाउँ जानुं बलिहारा ।। ४ ।।

भजन (2)

तेरो जन्म मरण मिट जाय हरिका नाम सुमर प्यारे ।। टेक ।। 

जग में आया नरतन पाया भाग्य बडे भारे,

मोह भुलाना कदर न जाना रेत रतन डारे ।। १ ।।

बालापन में मन खेलन में सुख दुख नहि धारे,

जोबन रसिया कामन बसिया तनमन धनहारे ।। २ ।।

बूढा होकर घर में सोकर सुने बचन खारे,

दुर्बल काया रोग सताया तृष्णा तन जारे ।। ३ ।। 

प्रभु नहि सुमरा बीती उमरा काल आय मारे,

ब्रह्मानंद बिना जगदीश्वर कौन विपत टारे ।। ४ ।।

भजन (3)

हरिनाम सुमर सुखधाम जगत में जीवन दो दिनका ।। टेक ।।

पाप कपटकर माया जोडी गर्वकरे धनका,

 सबी छोडकर चला मुसाफिर वासहुया बनका ।। १ ।।

सुंदर काया देख लुभाया लाड करे तनका,

छूटा श्वासबिखर गई देही ज्यों मालामनका ।। २ ।।

जोबन नारी लगे पियारी मौज करे मनका,

कालबलीका लगे तमाचा भूल जाय ठनका ।। ३ ।।

यह संसार स्वपनकी माया मेलापल छिनका,

ब्रह्मानंद भजनकर बंदे नाथ निरंजनका ॥४॥

भजन (4)

शरण पढेकी लाज आज तुम राखो भगवाना ।। टेक ।।

 जप तप योग यज्ञ नहि कीने नहि तीरथ दाना,

बिरथा बीत गई सब उमरा विपयन भरमाना ।। १ ।।

सत संगत में बैठ तुमारा किया न गुण गाना,

भवसागर जल दुस्तर भारी कैसे तर जाना ।। २ ।।

चौरासी लाख जीव जूनमें पुन पुन भटकाना,

तुमरे भजन बिना नहि कबहुं होय मोक्षपाना ।। ३ ।।

दीनदयाल दयाके सागर तुम सत्रगुणखाना,

ब्रह्मानंद में दास तुमारो मुझे न विसराना ।। ४ ।।

भजन (5)

तुम जाय बसे मोहन मथुरा गोकुल कब आवोगे ।। टेक ।।

मोरमुकुट पीतांबर माला गल पहरावोगे,

जमुनातटपर ग्वालनके संग धेनु चरावोगे ।। १ ।।

मीठी धुनसें शाम मनोहर बेन बजावोगे,

वृन्दावनकी कुंज गलिनमें रास रचावोगे ।। २ ।।

छीनछीन सखियनसें दधि माखन कब खावोगे,

राधा प्यारी शोच करे मन फिर मिल जावोगे ।। ३ ।।

अरिक्षणं तरस रही दर्शनको कब दिखलावोगे,

ब्रह्मानंद हमारे मनकी आश पुरावोगे ॥ ४ ॥